जब हम परमेश्वर की व्यवस्था का पालन करते हैं, तो हमारे लिए हमेशा भरपूर आशीषें तैयार रहती हैं। इसी कारण, पिता के युग से परमेश्वर द्वारा स्थापित पर्वों में—जैसे सब्त और फसह—हमेशा यह आज्ञा शामिल है, “इन्हें कभी न भूलना, बल्कि स्मरण रखकर हमेशा मानना।”
बाइबल कहती है कि हर युग में जो परमेश्वर की व्यवस्था मानते हैं, वे धर्मी ठहरकर आशीष पाएंगे, और जो इसका उल्लंघन करते हैं, वे विद्रोही ठहरकर श्रापित होंगे। इस्राएली, परमेश्वर की व्यवस्था न मानने के कारण ही बाबुल के बंदी हुए।
“हम तो अपने परमेश्वर यहोवा की शिक्षा सुनने पर भी उस पर नहीं चले जो उसने अपने दास नबियों से हमको सुनाई। वरन् सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस शाप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह शाप हम पर घट गया, क्योंकि हम ने उसके विरुद्ध पाप किया है।” दानियल 9:10-11
और मेरी विधियों पर चलता और मेरे नियमों को मानता हुआ सच्चाई से काम किया हो, ऐसा मनुष्य धर्मी है, वह निश्चय जीवित रहेगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है। यहेजकेल 18:9
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